Political satire in Sharad Joshi's literature: General overview

शरद जोशी के साहित्य में राजनीतिक व्यंग्य: सामान्य अवलोकन

Authors

  • Geetanjali Meena Research Scholar, Hindi Department, Rajasthan University, Jaipur (Raj.)

DOI:

https://doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n2.014

Keywords:

Sharad Joshi, political, satire, country, time

Abstract

The situation of the country and time is reflected in the literature. At present, the rulers and politicians have become so engrossed in personal interests, mutual conflicts, jealousy, hatred and their own will that they have forgotten the interest and welfare of the people. In return for their sacrifices made during the freedom struggle, they have started looting the country and its people with both hands. Sharad Joshi has expressed the subtlest inconsistencies of the political world in a very simple and natural way in his small satires, which is the main specialty of Joshi ji.

Abstract in Hindi Language:

देशकाल की स्थिति साहित्य में प्रतिबिम्बित होती है। इस समय सत्ताधारी एवं राजनीतिज्ञ व्यक्तिगत स्वार्थ, आपसी कलह, ईष्या, द्वेष तथा अपनी मनमानी करने में इतने लिप्त हो गये हैं कि वे जनता के हित एवं कल्याण को भूल बैठे हैं, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किये गये अपने त्याग और बलिदानों के प्रतिदान में वे दोनों हाथों से देश एवं देश की जनता को लूटने में लग गये हैं। शरद जोशी ने अपने छोटे-छोटे व्यंग्यों में राजनीतिक जगत् की सूक्ष्म से सूक्ष्मतर विसंगतियों को बड़े सहज एवं स्वाभाविक ढ़ंग से व्यक्त किया है जो जोशी जी की प्रमुख विशेषता है।

Keywords: शरद जोशी, राजनीतिक, व्यंग्य, देशकाल।

References

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शरद जोशी, नावक के तीर, प्रश्न करें, उत्तर दें, कूद पड़ें रू शरद जोशी, पृ. 25

शरद जोशी, जीप पर सवार इल्लियाँ, चुनाव गीतिका रू सरलार्थ, पृ. 157

शरद जोशी, मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ, सरकार का जादू, पृ. 83

शरद जोशी, तिलस्म, सारी बहस से गुजर कर, पृ. 111-112

शरद जोशी, यथासंभव, जैसे श्वान काँच मंदिर में, पृ. 22

शरद जोशी, नावक के तीर, भीड़ का अपार फालतू वक्त, पृ. 22-23

दो व्यंग्य नाटक, अन्धों का हाथी रू शरद जोशी, पृ. 139

शरद जोशी, यथासंभव, पृ. 384

यत्र तत्र सर्वत्र, समाजवाद रू एक उपयोगी चिमटा, पृ. 338

शरद जोशी, जीप पर सवार इल्लियाँ, शर्म तुमको मगर आती है, पृ. 84 33.

शरद जोशी, दो व्यंग्य नाटक, एक था गधा उर्फ अलादाद खाँ, पृ. 47 36.

शरद जोशी, हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारेशरद जोशी,, पृ 59

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Published

2024-04-30

How to Cite

Meena, G. (2024). Political satire in Sharad Joshi’s literature: General overview: शरद जोशी के साहित्य में राजनीतिक व्यंग्य: सामान्य अवलोकन. RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal, 11(2), 78–83. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n2.014