Study of religious consciousness in Hindi post-sixties stories

हिन्दी की साठोत्तरी कहानियों में धार्मिक चेतना का अनुशीलन

Authors

  • Abhimanyu Singh Research Scholar, Department of Hindi and Linguistics, Rani Durgavati Vishwavidyalaya Jabalpur (Madhya Pradesh).

DOI:

https://doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n1.017

Keywords:

Stories, Post-sixties, Religious consciousness, Differentiation, Human sensitivity

Abstract

Representation of religious consciousness in stories is mainly seen in two forms. Firstly, there are those stories where the negative side prevalent in religion has been made the basis and the responsibility of understanding those negative sides and eliminating them by considering them as a religious evil has been left to the readers. Such aspects can include superstition, ostentation, tendency to carry religion, differentiation, loss of human sensitivity, misuse of faith etc. At the second level, there are such stories, where the author himself tries to establish the real form of religion i.e. 'goodwill' in the minds of the people through the characters. Which is the positive side of religion.

Abstract in Hindi Language:

कहानियों में धार्मिक चेतना का प्रतिपादन मुख्यतः दो स्वरूपों में देखने को मिलता है। प्रथमतः वे कहानियां हैं जहाँ पर धर्म में व्याप्त नकारात्मक पक्ष को आधार बनाया गया है तथा उन नकारात्मक पक्ष को समझने एवं उसे एक धार्मिक बुराई समझकर समाप्त करने का उत्तरदायित्व पाठक वर्ग पर छोड़ दिया गया है। इस प्रकार के पक्षों में अंधविश्वास, आडम्बर, धर्म को ढोने की प्रवृत्ति, विभेदीकरण, मानवीय संवेदना का ह्रास, आस्था का दुरुपयोग आदि शामिल किये जा सकते हैं। द्वितीय स्तर पर ऐसी कहानियाँ हैं, जहाँ पर लेखक स्वयं पात्रों के माध्यम से जनमानस में धर्म के वास्तविक स्वरूप ’सद्भाव’ को स्थापित करने का प्रयास करता है। जो कि धर्म का सकारात्मक पक्ष है।

 Keywords- कहानियों, साठोत्तरी, धार्मिक चेतना, विभेदीकरण, मानवीय संवेदना।

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Published

2024-01-31

How to Cite

Singh, A. (2024). Study of religious consciousness in Hindi post-sixties stories: हिन्दी की साठोत्तरी कहानियों में धार्मिक चेतना का अनुशीलन. RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal, 11(1), 101–107. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n1.017